यह पुराणों व धर्मग्रन्थों में उल्लिखित जानकारियों का ‘तत्त्व ज्ञान ‘है। (यह वाट्सअप ज्ञान नहीं है)

आज सोमवार, आषाढ़ कृष्ण पञ्चमी तिथि है।
आज धनिष्ठा नक्षत्र, ‘कालयुक्त’ नाम संवत् 2082 है।
( उक्त जानकारी उज्जैन और काशी के पञ्चाङ्गों के अनुसार है)

👉 आज मध्याह्न 12:14 बजे से पञ्चक प्रारम्भ होंगे।
👉 जन्म कुण्डली में पाप ग्रह भी यदि स्व, उच्च, मित्र राशिस्थ, नवांश, वर्गोत्तम, शुभयुक्त, शुभ दृष्ट हो तो शुभ कारक होते हैं।
👉 जन्म कुण्डली के 1,4,7,8,12 वें भाव में स्थित मङ्गल यदि स्व, उच्च, मित्र आदि राशि नवांश का, वर्गोत्तम, षड्बली हो तो माङ्गलिक दोष नहीं होता है।
👉 उक्त भावों में स्थित मङ्गल पर बलवान शुभ ग्रहों की पूर्ण दृष्टि हो तो माङ्गलिक दोष नहीं होता है।
👉 इसी प्रकार सप्तम भाव का स्वामी बलवान हो तथा अपने भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा हो तो माङ्गलिक दोष का परिहार हो जाता है।
👉 जन्म कुण्डली में मङ्गल के साथ गुरु या चन्द्रमा हो तो भी माङ्गलिक दोष नहीं होता है।
👉 1,4,7,8,12 भावों में मङ्गल यदि चर राशि मेष, कर्क, मकर में स्थित हो तो माङ्गलिक दोष नहीं होता है।
👉 एक जन्म कुण्डली में जैसा मङ्गल तथा सूर्य और सूर्य, शनि, राहु, केतु आदि पाप ग्रह दूसरी जन्म पत्रिका में भी हो तो मङ्गल दोष नहीं रहता है।
👉 यद्यपि वर की जन्म कुण्डली माङ्गलिक हो तथा कन्या की जन्म कुण्डली के 1,4,7,8,12 भावों में सूर्य, शनि, राहु हो तो जन्म कुण्डली मङ्गल दोष से मुक्त हो जाती है।
👉 जिस भाव में मङ्गल स्थित हो, उस भाव का स्वामी ज्योतिष की दृष्टि से बलवान हो तथा उसी भाव में बैठा हो या उस भाव में उसकी दृष्टि पड़ रही हो, पुनः सप्तमेश या शुक्र तीसरे भाव में बैठा हो तो मङ्गल दोष नहीं माना जाता है।
👉 जन्म कुण्डली में मेष का मङ्गल लग्न में, वृश्चिक का मङ्गल चतुर्थ भाव में, वृषभ का मङ्गल सप्तम भाव में, कुम्भ का मङ्गल अष्टम भाव में तथा धनु का मङ्गल द्वादश भाव में हो तो मङ्गल दोष नहीं माना जाता है।
👉 जिस जन्म कुण्डली में उच्च का गुरु लग्न में स्थित हो तो माङ्गलिक दोष नहीं माना जाता है।
👉 शनि ग्रह 1,4,7,8,12 भाव में किसी एक जातक की जन्म पत्रिका में हो तथा दूसरे जातक की जन्म पत्रिका में इन्हीं स्थानों में से किसी एक स्थान में मङ्गल हो तो मङ्गल दोष का परिहार हो जाता है।
👉 यदि केन्द्र 1,4,7,10 तथा त्रिकोण 5,9 भाव में शुभ ग्रह हों तथा 3,6,11 भावों में अशुभ ग्रह हों एवं सातवें भाव में सप्तमेश हो तो मङ्गल दोष नहीं होता है।


कल मङ्गलवार 17 जून 2025
के व्रत – पर्व – उत्सव

   षष्ठी तिथि 

विजय अड़ीचवाल
ज्योतिष व वास्तु विशेषज्ञ
प्रधान सम्पादक: विप्र जगत्, इन्दौर
मोबा. 98262 47846

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विप्र जगत् (मासिक) पत्रिका, इन्दौर

                 आज का
   🌹 विप्र जगत् पञ्चाङ्ग 🌹
         (उज्जैन के पञ्चाङ्गों से साभार)

🌞 दिनांक 16 जून 2025 सोमवार

🌞 इन्दौर का सूर्योदय : प्रातः 5:45
🌞 इन्दौर का सूर्यास्त : सायं 7:09 बजे

👉 आषाढ़ कृष्ण पञ्चमी तिथि मध्याह्न 1:20 बजे तक, पश्चात् षष्ठी तिथि

👉 नक्षत्र :‌ धनिष्ठा नक्षत्र रात्रि 11:17 बजे तक, पश्चात् शतभिषा नक्षत्र

👉 योग : वैधृति योग प्रातः 10:02 बजे तक, पश्चात् विष्कुम्भ योग

👉 करण: तैतिल मध्याह्न 1:20 बजे तक, पश्चात् गर करण

👉 दिशाशूल – पूर्व दिशा में

👉 अयन : उत्तरायण

🌤️ ऋतु : ग्रीष्म ऋतु

👉 आज राष्ट्रीय सौर तिथि 26 ज्येष्ठ (शुक्र मास) 1947, युगाब्द 5127 है।

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